SkyWalk Glass Bridge: उत्तर प्रदेश के पहले स्काईवॉक ग्लास ब्रिज का वीडियो निकल कर आया सामने।

स्काईवॉक ग्लास ब्रिज:  उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में प्राचीन कथाओं को एक बार फिर जीवंत उदाहरण देने के लिए अत्यंत उत्कृष्ट और आकर्षक ब्रिज निर्माण हो रहा है। जिसका नाम है, स्काईवॉक ग्लास ब्रिज। प्राचीनतम और नवीनतम संगम की नगरी कहा जाने वाले शहर चित्रकूट में इसका निर्माण चल रहा है। यह ग्लास ब्रिज अपने अद्भुत डिजाइन और आकर्षण बिंदु के कारण मशहूर है।

स्काईवॉक ग्लास ब्रिज

अभी हाल ही में दूरदर्शन के x सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर स्काई ग्लास ब्रज का एक वीडियो सामने निकल आया है। इस विडियो में स्काई ग्लास ब्रिज की यूनिक डिजाइन को आसानी से देखा जा सकता है। इसमें उत्तर प्रदेश को भारत का अनोखा राज्य की उपाधि से भी सम्मानित होने का गौरव प्रदान किया जा रहा है। लेकिन भारत के हर राज्य की अपनी एक अनोखी धरोहर है। हर धरोहर अपनी एक यूनीकनेस को धारण करता है।

चित्रकूट का स्काई ग्लास ब्रिज प्राकृतिक सुंदरता भगवान राम को समर्पित किया गया है। इसीलिए इसे भगवान राम के धनुष और बाण के आकार में डिजाइन किया गया है। जो इस ब्रिज की प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी लोगो के सामने प्रस्तुत करता है।

स्काईवॉक ग्लास ब्रिज का उद्धघाटन।

प्राप्त जानकारी के अनुसार देखा जाए तो चित्रकूट में बन रहे इस स्काई वॉक ग्लास ब्रिज का उद्धघाटन लोक सभा चुनाव 2024 के समाप्ति के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। और इस ब्रिज का उद्धघाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा होने की संभावना भी जताई जा रही है। क्योंकि देखा गया है। कि अधिकतर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कल्याणकारी योजनाओं का सुभारंभ भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ही करते है।

स्काईवॉक ग्लास ब्रिज की यूनिक जानकारी।

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बने स्काईवॉक ग्लास ब्रिज की क्षमता की बात करे तो 500 किलोग्राम तक की वस्तु को एक वर्ग मीटर तक की जगह में सहन किया जा सकता है। वन विभाग और पर्यटन विभाग की संयुक्त प्रयास से बन रहे इस स्काईवॉक ग्लास ब्रिज की कुल लागत 3.7 करोड़ रुपये है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस ब्रिज को बिहार के राजगीर में बने स्काई वॉक ग्लास ब्रिज की डिजाइन के आधार पर बनाया जा रहा है।

इस स्काईवॉक ग्लास ब्रिज को 500 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर की भार क्षमता को सहन करने के लिए बनाया गया है। अगर हम इस ग्लास ब्रिज में बने तीर की लंबाई की बात करें तो इसकी लम्बाई 25 मीटर है। धनुष की चौड़ाई 35 मीटर है।

भगवान राम को समर्पित यह स्काईवॉक ग्लास ब्रिज कांच और स्टील का बनाया गया है। जिससे यह ट्रांसपेरेंट होने के कारण यहां से दिखने वाले दृश्य को और भी लुभावना बना देता है। यह वीरता और शौर्य को समर्पित ब्रिज 3.7 करोड़ से अधिक लागत का बना हुआ है। इसमें अधिक से अधिक रुपए का इन्वेस्टमेंट किया गया है। जिससे इसके सुंदरता को और अधिक बढ़ाया जा सके।

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद उद्घाटन के लिए निर्धारित स्काईवॉक ग्लास ब्रिज उत्तर प्रदेश में पर्यटन के पहल को जन्म देगा। इस स्काईवॉक से उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म केंद्र स्थापित किया सकेगा। और टूरिस्ट की भी ज्यादा से ज्यादा संख्या को यहां देखा जा सकेगा। मारकुंडी रेंज में बहने वाले तुलसी झरने के पास स्थित कोडंड वन को देखने का आनंद उठा सकते है।

तुलसी झरने का इतिहास।

तुलसी झरने का पहला नाम सबरी झरना था। लेकिन बड़े इस झरने का नाम परवर्तित् करके इसे तुलसी झरने के नाम से जाना गया। इसका नाम सबसे पहले उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में पाई जानें वाली कोल भील आदिवासी महिला सबरी के नाम पर रखा गया था। लेकिन बाद में इसका नाम बदल कर तुलसी जलप्रपात कर दिया गया।

स्काईवॉक ग्लास ब्रिज

प्राप्त जानकारी के अनुसार जब यह ब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा तब उत्तर प्रदेश का पहला ग्लास स्काईवॉक ब्रिज होगा। यह आमलोगों के लिए भी ओपन किया जाएगा। जिससे आम लोग भी सांस्कृतिक विरासत के साथ साथ प्राकृतिक सुंदरता का आनंद उठा सके।

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